करोना बीमारी के इस मंदी के समय शुरू करें अपना सर्फ वाशिंग पाउडर बनाने का व्यवसाय।

 कपड़ा धोने का सर्फ वाशिंग पाउडर बनाने की संपूर्ण विधि।



छोटे छोटे लघु उद्योग हमें कई प्रकार से फायदे देते हैं। एक तो पूंजी बहुत कम लगती है और थोड़े से मेहनत करने पर या काफी मुनाफा और इस घर परिवार और काफी लोगों को रोजगार देने में भी सहायता। प्रदान  करती है।

इनकी सफाई करने की अधिक शक्ति उपयोग करने में सुविधा तथा व्यापक प्रचार-प्रसार के फलस्वरूप इनके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है । तथा भविष्य में इनकी मांग निरंतर बढ़ते रहने की संभावना है ।


डिटर्जेन्ट पाउडर  उत्पादन के गुण व सामान्य जानकारी

ऐसे पदार्थ जो किसी भी सतह पर जमे हुए मिट्टी या धूल के कणों को साफ करने में सक्षम हो, डिटर्जेन्ट कहलाती है । यदि व्यापक रूप से देखा जाये तो यह कहा जा सकता है कि वे पदार्थ जो सफाई करने में सक्षम होते है । उन्हें डिटर्जेन्ट कहा जा सकता है । जैसे जल क्षार व क्षारीय लवण अम्ल व अम्लीय लवण अपधर्षी, आक्सीकारक व अपचायी कारक ।


इन सभी को हम डिटर्जेन्ट कह सकते है । संश्लेषित डिटर्जेन्ट के गुण अन्य साबुनों से भिन्न होते है । इस प्रकार के डिटर्जेन्ट से झाग अधिक बनती है । इनसे दागदार सतह पर तनाव कम हो जाता है । इमलसीकरण होता है, तथा इनमें सतह के अंदर तक तीव्रता से प्रवेश करने की अधिक क्षमता होती हैं । यही कारण है कि संश्लेषित डिटर्जेन्ट अन्य साबुनों से जल्द व तीव्र सफाई करते है ।


डिटर्जेन्ट पावडर में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख कच्चे माल की उपयोगिता (Utility of Major Raw Materials Used in Detergent Powder):

डिटर्जेन्ट पावडर में प्रयुक्त किये जाने वाले प्रमुख तत्व है । सोडा ऐश कार्बोक्सी मिथाइल क्लोराइड, सोडिम परबोरेट, फेनवर्धक रसायन, रंग तथा सुगंधित पदार्थ ।

इन पदार्थों की उपयोगिता निम्नानुसार है:


1. सोडा एश (सोडियम कार्बोरनेट) (Soda Ash (Sodium Carbonate)):


सोडा एश की उपस्थिति एसिड स्लरी को उदासीन करने में काम आती है । और यह संपूर्ण धुलाई को क्षारीय गुण भी प्रदान करता है । साथ ही सोडा एश एक सस्ते क्षारक का उपयुक्त स्त्रोत भी है ।


2. कार्बोक्सी मिथाइल क्लोराइड (सेल्युलोस) (Carboxyl Methyl Chloride (Cellulose)):



यह कपड़ों की सतह पर चढ़ी मैल को पुन: जमने से रोकता है । तथा सूती कपड़ो पर विशेष रूप से कार्य करता है ।


3. सोडियम परबोरेट (Sodium Parabaret):


यह एक हल्के ब्लीच का कार्य करता है । इसके उपयोग से कपड़ों के रंग भी खराब नहीं होते तथा कुछ हद तक इसकी उपस्थिति से पावडर में क्षारीय गुण भी आते है ।


4. सुगन्ध (Fragrance):


डिटर्जेन्ट पावडर मे कई तरह के परफ्यूमस डाले जाते है । तथा इनका प्रमुख कार्य पावडर की तीव्र दुर्गन्ध को हटाना होता है । सुगन्ध की उपस्थिति से उसके उपयोगकर्ताओं को सफाई में सुगन्धी आती है । डिटर्जेन्ट पावडर के उपयोग में लाई जानी वाली सुगंधों में प्रमुख है- 


5. रंग (Colour):


सफेद रंग के डिटर्जेन्ट की अपेक्षा रंगीन पावडर ग्राहकों को ज्यादा आकर्षिक करते है । इसी कारण से डिटर्जेन्ट में रंगों को मिलाया जाता है। प्रमुखमत: इनमें कॉपर फिथैलो साईमान मिलाया जाता है । क्योंकि यह ताप व प्रकाश बाधक होता है ।


6. फैनवर्धक रसायन (Functional Chemistry):


डिटर्जेन्ट पावडर में इनकी उपस्थिति झाग बनाने के लिए तो होती ही है । इनके द्वारा सफाई करने की क्षमता में भी वृद्धि होती है । इस कार्य हेतु मुख्यतः सैपोनिन या लॉंरिक इथैनोलाइड का उपयोग किया जाता है ।


डिटर्जेन्ट पावडर की निर्माण प्रक्रिया

डिटर्जेन्ट पावडर के निर्माण की प्रक्रिया अत्यंत ही सरल है तथा बिना किसी विशिष्ट प्रशिक्षण के इसका निर्माण आसानी से किया जा सकता है ।


डिटर्जेन्ट पावडर की प्रक्रिया संक्षेप में इस प्रकार हैं:

डिटर्जेन्ट पाउडर की इकाई के वित्तीय पहलू 

1. भूमि तथा भवन की आवश्यकता 


इस इकाई की स्थापना हेतु लगभग 800 वर्गफीट के निर्मित शेड/मकाई की आवश्कता होगी । ऐसी शेड लगभग 1000 रू प्रतिमाह के किराए पर उपलब्ध हो सकेगा ।


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