झारखंड में छठी जेपीएससी के असफल अभ्यार्थियों ने आंदोलन की बनायी रणनीति

झारखंड में छठी जेपीएससी के असफल अभ्यार्थियों ने आंदोलन की बनायी रणनीति

झारखंड में छठी जेपीएससी के असफल अभ्यार्थियों ने आंदोलन की बनायी रणनीति



दुमका: जेपीएससी असफल अभ्यर्थियों ने छठी जेपीएससी के परिणामों के खिलाफ एसपी काॅलेज परिसर में शुक्रवार को बैठक आयोजित की। बैठक में जेपीएससी के गठन के बाद से नियुक्त कम एवं विवाद अधिक होने पर चर्चा की।
बैठक में पहली एवं दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में हुई अनियमितता पर चर्चा करते हुए कहा कि नियुक्त भ्रष्ट अधिकारी गरीब जनता की खून चूसने का कार्य कर रहे हैं।
वहीं इन अधिकारियों के सहारे मुख्यमंत्री विकास के दावा कर रहे हैं, जो असंभव है। दूसरी ओर पांचवी और छठी जेपीएससी पीटी स्तरीय आरक्षण को पूरी तरह से खत्म कर देने पर राज्य के मूल निवासियों के साथ छल करने का आरोप लगाया है।
छठी जेपीएससी पिछले 5 साल से विवादों में होने और तीन बार रिजल्ट में संशोधन पर भी सवाल खड़ा किया है। असफल अभ्यार्थियों ने वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के किए वादा को याद दिलाते हुए कहा कि प्रतिपक्ष में रहते हुए विद्यार्थियों से वादा किए थे कि सत्ता आने पर इसे रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने इसके लिए 4 दिन विधानसभा भी चलने नहीं दिया था।
4 फरवरी 2019 को धनबाद में झामुमों के स्थापना दिवस में स्वयं स्वीकार करते हुए छठी जेपीएससी में 50 से 60 सीट ऐसे हैं जो नेता और अधिकारियों के पुत्र, पुत्रियों को बांटने का आरोप तत्कालीन सरकार पर लगाया था।
जिसमें करोड़ों का लेनदेन का आरोप भी लगाया था। छठी जेपीएससी में अनगिनत खामियां और व्याप्त भ्रष्टाचार का आरोप अभ्यार्थियों ने लगाया है।
जिसमें आरक्षण खत्म करना, पुराने प्रश्न पत्रों से परीक्षा लेना, परीक्षा केंद्र में प्रश्न पत्रों का खुला मिलना, प्रश्नों में पेंसिल टिक के निशान मिलना, 15 जेपीएससी स्टाफ द्वारा स्कूटनी करना जो अभ्यर्थी भी शामिल हैं।
अभ्यार्थियों ने प्रकाशित परिणाम पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया इस वैश्विक महामारी कोविड 19 और लॉक डाउन की स्थिति से लड़ रहे थे। तब चोरी से 21 अप्रैल को अंतिम परिणाम प्रकाशित कर देती है। जिसमें भी कई बड़ी-बड़ी त्रुटियां सामने आती हैं।
जैसे क्वालीफाइंग पेपर से मेरिट बनाना, विषयवार 40 फीसदी अंक लाने का उल्लंघन एवं अधिक अंक लाने पर भी एसटी-एससी और ओबीसी को निम्न स्तरीय पद में रखना आदि करके अपने ही विज्ञापन का घोर उल्लंघन का आरोप लगाया है।
पीड़ित अभ्यार्थी वादा के अनुरूप और भ्रष्टाचार को देखते हुए विज्ञप्ति को अविलंब वापस लेने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया है।
साथ ही जेपीएससी के भ्रष्ट पदाधिकारियों को बर्खास्त करने और संस्थान की पारदर्शिता कायम रखने का आग्रह किया है। चुकी पिछले 4 साल से अभ्यार्थी भूख हड़ताल, अनशन और सत्याग्रह करते आ रहे हैं।
बैठक में पीड़ित अभ्यार्थियों की ओर से राज्य व्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा किया गया। वहीं पंचायत सचिव की नियुक्ति शीध्र करने की भी मांग उठाने पर निर्णय लिया गया।
इधर छात्र उलगुलान पदयात्रा की भी रणनिति बनायी गई। आगामी 9 से 30 जून के बीच 21 दिन में कुल 556 किलोमीटर उलीहातू से भोगनाडीह तक “छात्र उलगुलान पदयात्रा“ की रणनीति पर सहमति बनी।              
दुमका में पदयात्रियो की स्वागत के लिए पीड़ित अभ्यर्थियों ने जिम्मेवारी ली। जिसमें जतिन कुमार, रूपेश कुमार, रहिम अंसारी सहित अन्य शामिल थे। बैठक में जतिन कुमार, रुपेश, इमाम सफी, गुलाम हुसैन, मेहराब हक, अभिषेक, आरिफ अन्य शामिल थे।
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