ऑयस्टर मशरूम कैसे खेती करें ,मशरूम खाने से होने वाले फायदे,How to Cultivate Oyster Mushroom

ऑयस्टर मशरूम कैसे खेती करें? | How to Cultivate Oyster Mushroom? | Hindi |




ढींगरी खुंभी लिग्निन सेल्युलोज वाले पौध अवशेष पर बढ़ने वाला कवक है, जो कि प्रकृति में शीतोष्ण और उष्णकटिबधीय जंगलों में मुख्यतः मृत और सडी गली लकडियों या कभी कभी क्षयमान/कार्बनिक पदार्थों पर उगती है ।
सारे संसार का लगभग आधा कृषि अवशेष भूसा, पत्तियों आदि के रूप में अनुपयोगी पडा रहता है । इन कृषि अवशेषों पर ढींगरी खुंभी आसानी से उगकर विटामिन, लवण और उच्च प्रोटीन वाला खाद्य बनाती है । आयस्टर खुंभी की खेती सबसे पहले जर्मनी में फ्लेंक (1917) ने पेडों, लकड़ी के गुट्‌ठों और तनों में निवेशन करके शुरू की ।

ऑयस्टर मशरूम कैसे खेती करें


व्यावसायिक उत्पादन:

आयस्टर खुंभी की खेती के लिए गेहूँ की भूसी, धान का पैरा, मक्के का भुट्‌टा, सूखी जलकुंभी, गन्ने की खोई, केले की पत्ती, तना, कपास का अवशिष्ट या लकड़ी का बुरादा रागी, मक्का, बाजरा, कपास, सरसों का डंठल या पत्तियाँ, चाय, कॉफी या जूट के अवशिष्ट आदि पर इसे आसानी से उगाया जा सकता है । जिस किसी भी किस्म के भूसे का प्रयोग करना हो वह सूखा हो और उसमें किसी भी तरह के फफूंद का प्रकोप नहीं होना चाहिये ।


ऑयस्टर मशरूम कैसे खेती करें i 


वर्तमान समय में बढती हुई जनसंख्या के कारण लगातार कृषि जोत भूमि घटती जा रही है जिसके कारण पौष्टिक खाद्य पदार्थ का उत्तपादन कर पाना एक समस्या बनता जा रहा है | इस परिस्थिति में मशरूम की खेती करना आवश्यक समझा जाने लगा है | क्योकि मशरूम में प्रोटीन , विटामिन एवं खनिज लवण पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है तथा इसकी खेती के लिए खेत की जरूरत भी नहीं पड़ती है, बस एक छायादार कमरे के अन्दर चाहे वो घास का हो या कच्चे या पक्के मकान का एक कमरा हो, बस हवा का आवागमन एवं पानी की सुविधा हो बस हम सुगमता पूर्वक मशरूम की खेती कर सकते है | इसकी खेती की एक और विशेषता होती है की यह अन्य सब्ब्जी या अनाज की भाति अधिक समय नहीं लेती है | यदि बिज उपलब्ध हो तो ३० दिन के अन्दर इसकी फसल तैयार हो जाती है | और अगर हम इसका तापमान नियंत्रित कर सके तो हम इसकी खेती सालभर कर सकते है |


और इसकी खेती करना भी बहुत आसन है बस हमें गेहू का भूसा, धान की पुआल, ज्वार या फिर बाजरे का डंठल चाहिए | हमें भूसे को साफ पानी से भिगान है और उस भीगे हुए भूसे को एक पालीथीन में भरना है और भूसा भरते समय ही एक लेयर भूसे का एवं उसके ऊपर कुछ बिज मशरूम के फिर एक लेयर भूसे का और एक लेयर मशरूम के बिज का इसी तरह कर के रख देना है ताकि भूसा चारो तरफ फ़ैल ना सके और उस पालीथीन में कुछ सुराख़ भी कर देना चाहिए जिससे की हवा आ, जा सके और प्रतिदिन भूसे पर साफ पानी का छिडकाव करना चाहिए | बस ३० दिनों के अन्दर मशरूम तैयार हो जायेगा |

हमारे देश में बहुत से किसान इन फसल अवशेष को जला देते है जिससे की वायु में प्रदुषण बढ़ जाता है और पर्यावरण असंतुलित हो जाता है जिसका प्रभाव प्रकृति में रहने वाले अन्य जीवो पर पड़ता है | अतः मशरूम की खेती करने से पर्यावरण को सुरछित रखा जा सकता है | मशरूम उत्तपादन के पश्चात् जो भी फसल का अवशेष बचाता है उसका उपयोग हम जैविक खाद बनाने में ला सकते है एवं अपने खेतो में डाल सकते है | जिससे की खेत की उरवरा शक्ति में में ब्रिधि होगी, तथा खेत में जीवाष्म की मात्रा बढ़ेगी| इस तरह करने पर हमारे खेत की भौतिक एवं रासायनिक संरचना में सुधार होता है |


ऐसे करें शुरूआत.. दस किलो भूसे को 100 लीटर पानी में भिगोया जाता है, इसके लिए 150 मिली. फार्मलिन, सात ग्राम कॉर्बेंडाजिन को पानी में घोलकर इसमें दस किलो भूसा डुबोकर उसका शोधन किया जाता है। भूसा भिगोने के बाद लगभग बारह घंटे यानि अगर सुबह फैलाते हैं तो शाम को और शाम को फैलाते हैं तो सुबह निकाल लें, इसके बाद भूसे को किसी जालीदार बैग में भरकर या फिर चारपाई पर फैला देते हैं, जिससे अतिरिक्त पानी निकल जाता है।

सहारनपुर जिले के रामपुर मनिहार ब्लॉक के मदनूकी गाँव में दर्जन से अधिक किसान मशरूम की खेती करने लगे हैं। मदनूकी गाँव के किसान सत्यवीर सिंह ने 2009 में कृषि विज्ञान केंद्र की सहायता से उन्होंने मशरूम की खेती की शुरूआत की। वो बताते हैं, "साल 2009 में मैंने मशरूम की खेती तीस कुंतल कंम्पोस्ट के एक छोटी सी झोपड़ी बनाकर शूरू की थी। आज मैं साल में लगभग 6000 बैग्स में बटन मशरूम लगाता हूं, और आठ हजार बैग आयस्टर मशरूम के लगता हूं। वो आगे बताते हैं, "शुरू में मुझे परेशानी हुई थी, लेकिन केवीके वैज्ञानिक कुशवाहा जी से मैंने प्रशिक्षण लिया था और अब भी वो हमारी पूरी सहायता करते हैं। समय-समय पर वो आकर हमें बताते रहते हैं कि कैसे मशरूम की खेती को रोगों से बचाए, कैसे कम्पोस्ट बनाए ये सब जानकारी देते रहते हैं।"

मशरूम खाने से होने वाले फायदे -

1. मशरूम में विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम भरपूर मात्रा में होता है। यह मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बढ़ाने
में बेहद फायदेमंद होता है।

2. मशरूम में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते है, जो बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने और वजन घटाने में मदद करते हैं।

3. मशरूम में मौजूद तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

4. मशरूम खाने से सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां जल्दी नहीं
5. मशरूम में विटामिन डी भी होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।

6. यदि आप नियमित तौर पर मशरूम खाते हैं, तो मान लीजिए कि आपकी आवश्यकता का 20% विटामिन डी आपको इसके सेवन से मिल रहा है।

7. मशरूम में बहुत कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जिससे आपका वजन और ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

8. मशरूम में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी अधिक नहीं होती, साथ ही इसके सेवन से काफी वक्त तक भूख भी नहीं लगती।
9. मशरूम का सेवन केवल सेहत ही नहीं बल्कि बालों और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है। यहां तक कि कुछ स्टडी में यह भी बताया गया है कि इसके नियमित सेवन से कैंसर होने की आशंका भी कम होती है।

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