केरल मॉडल के आगे करोना ने भी घुटने टेके।

केरल मॉडल के आगे करोना ने भी घुटने टेके।

कोरोना वायरस से यूं तो देश का हर राज्य अपने तरीके से लड़ रहा है, लेकिन कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने ये साबित कर दिखाया है कि अगर कड़े नियम और अलग रणनीति से काम लिया जाए तो किसी भी महामारी से लड़ा जा सकता है. कुछ ऐसा ही कर केरल ने भी कर दिखाया है. जहां कोरोना के केस तो सामने आए, लेकिन यहां की सरकार ने इसकी स्पीड पर ब्रेक लगा दिया. कोरोना से पहले भी निपाह वायरस को लेकर भी केरल मॉडल ने देश के सामने एक नजीर पेश की थी.



कोरोना के लिए हो रहे अलग प्रयोग

यूं तो सभी जगह अलग-अलग प्रकार के प्रयोग किए जा रहे हैं। करोना की रोकथाम के लिए पर केरल में एक अलग तरह का ही प्रयोग किया है। वहां टैक्सी ड्राइवरों और उनके सवारियों के बीच में एक शीशे की दीवार बना दी गई है। ताकि उन लोगों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके और लोगो के बीच  दूरी बनी रहे।

मजबूत है केरल का हेल्थ मॉडल


कोरोना चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ था. जहां केरल के कई छात्र पढ़ाई के लिए जाते हैं. ऐसे में राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय था कि जब ये छात्र लौटकर आएंगे तो क्या होगा? स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने जनवरी के आखिरी हफ्ते में बैठक बुलाई और तैयारी शुरू कर दी. जिसके बाद 30 जनवरी को भारत का पहला केस केरल में आया. लेकिन इससे पहले ही कंट्रोल रूम तैयार हो चुका था. देखते ही देखते पूरे राज्य में जागरुकता अभियान चलाया गया. हर जिले में स्वास्थ्य कर्मियों की टीमों को रवाना कर दिया गया. जिसके बाद आज केरल की भारत सहित दुनियाभर में चर्चा हो रही है.



नोट- करोना महामारी में अपने हाथों को 20 सेकंड धोएं और अच्छे से धोएं और बाहर से जाने में चेहरे पर मास्क आवास लगाएं और मोटरसाइकिल में हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें।

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