पुदीना ,न कीड़े लगने का डर, न ही बरसात के पानी का डर।

पुदीना ,न कीड़े लगने का डर, न ही बरसात के पानी का डर। 


पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है। पुदीना को तेल, टूथ पेस्ट, माउथ वॉश और कई व्यंजनों में स्वाद के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इसके पत्ते कई तरह की दवाइयां बनाने के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं। पुदीने से तैयार दवाइयों को नाक, गठिया,नाड़ियां, पेट में गैस और सोजिश आदि के इलाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इसे व्यापक श्रेणी की दवाइयां बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक छोटी जड़ी-बूटी होती है जिसकी औसतन ऊंचाई 1-2 फीट के साथ फैलने वाली जड़ें होती हैं। इसके पत्ते 3.7-10 सैं.मी. लंबे और जामुनी रंग के छोटे फूल होते हैं। इसका मूल मैडिटेरेनियन बेसिन है। यह ज्यादा अंगोला, थाइलैंड, चीन, अर्जेंनटीना, ब्राज़ील, जापान, भारत और पारागुए में पाया जाता है। भारत में उत्तर प्रदेश और पंजाब भारत के पुदीना उत्पादक राज्य हैं।


हाड़ी के साथ-साथ बलुई और दोमट मिट्टी में पुदीने की फसल अच्छी होती है। कभी कीड़ा नहीं लगता है और 60 से 70 दिन में फसल आ जाती है। मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ से आती जड है और 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर रोपाई कर दी जाती है। फरवरी और मार्च में बुआई की जाती है। पुदीना हरा और ताजा पाने के लिए ऐसा नहीं है कि खेत पर ही लेने जाया जाए। आपके घर में जहां फूलों के गमले रखे हैं, वहां गमले में पुदीना लगा सकते हैं। लॉन में बड़े गमलों में लगा लें। पुदीने की जड़ किसी भी फूलों वाले गमले लगा दें, वह स्वत: निकल आएगी। पुदीना के पत्तों से भीनी-भीनी सुगंध आती रहती है।


पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है। इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है। उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है। इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए|


फसल की कटाई



पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें। कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें। अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें। ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

कटाई के बाद

कटाई करने के बाद तेल निकालने के लिए उसके नर्म तनों का प्रयोग किया जाता है। फिर पुदीने के तेल को पैक करके बड़े स्टील के या एल्यूमीनियम के बक्सों में रखा जाता है। फसल को नुकसान होने से बचाने के लिए जल्दी मंडी में भेजा जाता है। पुदीने की पत्तियों से काफी तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं जैसे प्रक्रिया के बाद पुदीने का तेल और चटनी आदि।
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न कीड़े लगने का डर, न ही बरसात के पानी का डर। यही कारण है कि पुदीना की फसल के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। जड़ की बुवाई होने के बाद फसल 60 से 70 दिन में बाजार में पहुंच जाती है। इस फसल में किसी प्रकार का कोई रसायन नहीं डालना पडता है। यह मेथी की तरह तीन से चार-बार काटा जाता है। बाजार में इसका भाव 100 से 150 रुपए पसेरी (पांच किलो) बिकता है। एक हेक्टेयर में एक किसान एक लाख रुपये से सवा लाख रुपए का मुनाफा उठा लेते हैं।


70 रोगों में काम करता है पुदीना मुंह की दुर्गंध, जहरीले कीडों के काटने पर, चेहरे की सौंर्दयता, गैस, आंतों के कीड़े, बिच्छू के डंक मारने पर, पेट में दर्द, त्वचा के रोग, सर्दी और खांसी, बदहजमी, त्वचा की गर्मी, रक्त का जमना, पित्ती, सिर का दर्द, हैजा, बच्चों के रोग, वायु के रोग, आंतों के रोग, शीत बुखार, टायफायड, निमोनिया सहित स्त्री के रोगों को मिलाकर 70 रोगों पर पुदीना काम करता है।

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