गूलर रहस्यमयी है गूलर का फूल

 गूलर
रहस्यमयी है गूलर का फूल



हमारे घर के आस पास ऐसे कई पेड़ पौधे होते हैं जिनकी तरफ़ हमारा ध्यान ही नहीं जाता है क्योंकि इनके औषधीय गुणों से हम लोग अंजान होते हैं। इन्हीं वनस्पतियों में एक गूलर भी है जो औषधीय गुणों की खान है और यह ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाता है। गूलर को संस्कृत में उदुम्बर व जन्तुफल कहा जाता है। हिंदी में इसे गूलर, काकमाल तथा मराठी में इसे उम्बर तथा औदुम्बर, गुजराती में इसे उम्बरों और कन्नड़ में अति के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में गूलर की जड़, गूलर के फूल और गूलर के फल का उपयोग कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।
गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। जबकि पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल व कब्ज़ मिटाने वाला है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन को शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्ज़ी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं।

गूलर और शुक्र का संबंध 



गूलर और शुक्र का संबंध गूलर वृक्ष शुक्र का प्रतिनिधि वृक्ष है। इसमें नियमित रूप से जल अर्पित करने से शुक्र की अनुकूलता प्राप्त होती है। शुक्र भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण, लावण्य, यौन सुख, प्रेम विवाह आदि का प्रतिनिधि ग्रह है। इसलिए शुक्र को अनुकूल बनाने के लिए गूलर के वृक्ष में नियमित जल अर्पित करना महत्वपूर्ण है। जन्मकुंडली में शुक्र अशुभ स्थिति में हो तो गूलर के प्रयोग से शुक्र की पीड़ा को शांत किया जा सकता है।

दैवीय वृक्ष है गूलर

अब बात करते हैं दैवीय वृक्षों की। नीम, पीपल और बरगद की त्रिवेणी के बारे में तो आपने सुना ही होगा। इन तीनों वृक्षों को हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय माना गया है। इनके अलावा एक और दैवीय वृक्ष है गूलर का वृक्ष। वैसे तो इसकी पूजा करने के लिए कोई दिन निर्धारित नहीं है, लेकिन यह नवग्रहों के वृक्षों में एक प्रमुख वृक्ष है। इस वृक्ष पर शुक्र का आधिपत्य माना गया है और वृषभ व तुला राशि का यह प्रतिनिधि पेड़ है। इस वृक्ष के अनेक लाभ हैं जिनकेइस वृक्ष के अनेक लाभ हैं जिनके बारे में जनसामान्य को जानकारी नहीं है। इस वृक्ष के फल, पत्ते, जड़ आदि से अनेक रोगों का इलाज तो होता ही है, इनसे ग्रह जनित अनेक दोषों को शांत किया जा सकता है।


रहस्यमयी है गूलर का फूल
रहस्यमयी है गूलर का फूल गूलर के फूल के बारे में कहा जाता है कि आजतक पृथ्वी पर इसके फूल को किसी ने नहीं देखा। इसके रहस्यमयी होने के कारण प्राचीनकाल से कई तरह की चर्चाएं, बातें कही जाती रही हैं। कहा जाता है गूलर के फूल रात में खिलते हैं और खिलते ही स्वर्गलोक में चले जाते हैं। इसके फूल कभी भी पृथ्वी पर नहीं गिरते। कहा जाता है कि इसके फूल कुबेर की संपदा है इसलिए यह पृथ्वीवासियों के लिए उपलब्ध नहीं है। कई लोग गूलर के फूल खिलने और देखने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में वे गूलर के फूल नहीं होते हैं।

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