गिरिडीह News बॉलीवुड के दिग्गज गायक गायिकाओं ने गीतकार मुकेश के गीतों को दी आवाज। -फ़िल्म पीआरओ कुमार यूडी की रिपोर्ट।

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  बॉलीवुड के दिग्गज गायक गायिकाओं ने गीतकार मुकेश के गीतों को दी आवाज। -फ़िल्म पीआरओ कुमार यूडी की रिपोर्ट।
बॉलीवुड के दिग्गज गायक गायिकाओं ने गीतकार मुकेश के गीतों को दी आवाज।
-फ़िल्म पीआरओ कुमार यूडी की रिपोर्ट।
गिरिडीह (झारखण्ड)।छोटे से गाँव और शहर से कई प्रतिभाशाली सख्सियत हुए।जिन्होंने अपनी प्रतिभा से अपनी पहचान बनायीं।गीतकार मुकेश सावन भी उन्हीं में से एक हैं।यूँ तो लेखन कला कोई सीखने की चीज नहीं बल्कि जिसमें कला होती हैं।वह संघर्ष के समय में संघर्ष करते करते बेहतर हो जातें हैं।मुकेश सावन के गीत लेखन कला भी कुछ ऐसी ही हैं।खोरठा,भोजपुरी और हिंदी फिल्मों सहित म्यूजिक एल्बम के लिए सैकड़ों गीत लिख चुकें गीतकार मुकेश सावन का गिरिडीह से मुम्बई का संघर्षमय और सफलतम सफर आसान न था।जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव से गुजरने के बाद यह मुकाम हासिल  किया।मुकेश सावन के गीतों को दीपा नारायण,सुरेश वाडेकर,कुमार सानु,अल्का याग्निक,उदित नारायण,इंदु सोनाली,अमन त्रिखा,मोहन राठौर,ममता राउत,खुशबु जैन आदि जैसे गायक गायिकाओं ने अपनी आवाज दी।


मुकेश सावन का प्रारंभिक जीवन।
गिरिडीह जिला के जमुआ प्रखण्ड व हिरोडीह थाना अंतर्गत करिहारी गाँव के निवासी गीतकार मुकेश सावन का जन्म वर्ष 1984 में हुआ।पाँच भाई बहनों में मुकेश सबसे बड़े हैं।पिता जगदीश मण्डल दिल्ली के निजी कंपनी में नौकरी किया करते थे।माँ शांति देवी एक गृहणी हैं।गाँव में रह कर ही मुकेश ने अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी की।मुकेश सावन कभी सोचे नहीं थे कि गीतकार बनेंगे।पर लिखने का शौक युवा उम्र से ही रहा हैं।




घर छोड़ कर दिल्ली गए और वापस आनें पर फिर मुम्बई गए।
मुकेश अपनी पढ़ाई पूरी करने से पहले एक बार घर छोड़ दिल्ली चले गए।पर जब अपनों ने समझाया तो वापस लौट आयें।चूँकि,घर पर बिना बतायें ही बाहर चले जाना मुकेश की मजबूरी रही।क्योंकि,घर पर बताने से बाहर नहीं जानें दिया जाता था।इसलिए,हमेशा बिना बतायें ही मुकेश हमेशा बाहर चल देते थे।दिल्ली से लौटने के बाद मुकेश ने अपनी पढ़ाई पूरी की।फिर वर्ष 2002 में मुम्बई चलें गए।


मुम्बई में दोस्तों से मिली सहायता,गुणवंत सेन और राज सेन से मिला पहला मौका।
वर्ष 2002 में मुम्बई आनें के बाद दो मित्र करण दीवाना और दशरथ मण्डल का बहुत सहयोग मिला।पहली बार मुम्बई आनें के बाद कई जगह काम के लिए मिलना जुलना लगा रहा।पर मौका मिलना इतना आसान भी न था।फिर संगीतकार गुणवंत सेन और राज सेन ने गीत लिखने का काम दिया।पहले एक गीत लिखने को कहा गया।पर बाद में सभी गीत मुकेश से ही लिखवाया गया।साँवरिया रे पहला म्यूजिक एल्बम रहा,जिसमें उदित नारायण की पत्नी दीपा नारायण ने आवाज दी।जो दास म्यूजिक कंपनी के द्वारा रिलीज की गयी।इस एल्बम के बाद मुकेश ने एक के बाद एक गीत लिखा और इस तरह मुकेश के गीतों की संख्या सैकड़ों में हो गयी।


मशहूर गीतकार समीर से हुए प्रेरित,खोरठा भोजपुरी और हिंदी फिल्मों के लिए लिख चुकें हैं गीत।
मुकेश सावन बॉलीवुड के मशहूर गीतकार समीर के गीतों को ही सुनकर प्रेरित हुए।युवा उम्र में ही उनके गीतों को सुनना मुकेश सावन की रूचि रही हैं।हिंदी म्यूजिक एल्बम के गीत लेखन से शुरुआत कर अब तक मुकेश सावन हिंदी फ़िल्म चिलखारी एक दर्द,खोरठा फ़िल्म साजन के बाँहों में और भोजपुरी फ़िल्म छैला संदू के लिए गीत लिख चुके हैं।सैकड़ों गीतों में कई मशहूर गायक गायिकाओं ने मुकेश के गीतों को आवाज दी।जिनमें दीपा नारायण,सुरेश वाडेकर,कुमार सानु,अल्का याग्निक,उदित नारायण,इंदु सोनाली,अमन त्रिखा,मोहन राठौर,ममता राउत,खुशबु जैन,प्रियंका सिंह,सतीश दास आदि शामिल हैं।


आज मुकेश सावन की पहचान एक गीतकार के रूप में हैं।जो न सिर्फ बॉलीवुड में बल्कि भोजपुरी व अन्य फ़िल्म उद्योग में भी खासे लोकप्रिय हैं।मुकेश सावन यूँ तो कई म्यूजिक डायरेक्टर के साथ काम कर चुके हैं।पर भविष्य में संगीतकार उमेश मिश्रा के साथ इनकी जोड़ी काफी समय गीत संगीत निर्माण में सक्रिय रहेगी।वर्तमान में उमेश मिश्रा के साथ कई गीतों का काम कर चुकें हैं।



रिपोर्ट हमारे फिल्मी संवाददाता ......✎✎✎युधिष्ठिर महतो

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