7 लाख तक की कमाई। अमरूद खेती अपनाएं और अपनी आमदनी बढ़ाएं।किसान भाइयों के लिए खेती के साथ रोजगार का मौका।

अमरूद खेती अपनाएं और अपनी आमदनी बढ़ाएं।किसान भाइयों के लिए खेती के साथ रोजगार का मौका
करें सालाना 7 लाख तक की कमाई।

अमरूद भारत का बहुत ही लोकप्रिय फल है। ये देश के ज्यादातर हिस्सों में आसानी से पाया जा सकता है। गुणों से भरपुर अमरूद को ‘गरीबों का सेब’ भी कहा जाता है। इसमें विटामिन्स, आयरन और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। अमरूद को जहां फल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, वहीं इससे जेली, बर्फी और कई तरह की चीजें भी बनाई जाती है। अपने बहुउपयोगिता की वजह से भारत में इसकी काफी डिमांड है। इसकी बागवानी उत्तराखंड से लेकर कन्याकुमारी तक की जाती है। इसलिए देश में उगाए जाने वाले फलों में क्षेत्रफल और उत्पादन के लिहाज से अमरूद अमरुद की खेती को चौथे स्थान पर रखा गया है।
इस लेख में हम आपको अमरूद की खेती से जुड़ी हर महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में बताएंगे। ऐसे में अगर आप भी अमरूद की बागवानी करने के इच्छुक हैं, तो हमारा ये लेख पूरा जरूर पढ़े। इससे आपको अमरूद की बागवानी, उसके लिए जलवायु, मिट्टी, सावधानियां हर चीजों की जानकारी मिलेगी।


कैसे होती है ताइवान पिंक अमरूद की खेती 'ताइवान पिंक ग्वावा' 
कैसे होती है ताइवान पिंक अमरूद की खेती 'ताइवान पिंक ग्वावा' के पौधों में भूमि से मात्र एक फीट के ऊपर से ही फल लगना शुरु हो जाता है। इस प्रजाति के पौधों को लगाने के बाद मात्र छह महीने के बाद से ही फल आने लगता है। धीरेन्द्र कुमार राय बताते हैं, "मैंने 'ताइवान पिंक ग्वावा' किस्म के अमरूद की सघन बागवानी की है। इसकी विशेषता है कि इसमें बारह महीने फूल और फल लगते रहते हैं। एक फल लगभग 150 ग्राम से 5 सौ ग्राम तक का होता है। इसका कच्चा फल भी खाने योग्य होता है, वहीं पकने पर फल का गूदा गुलाबी रंग का होता है। उनके द्वारा बाग में 2.5×3 के मॉडल पर पौधों का रोपण किया है। इस तरह से एक बीघे में 400 से 500 पौधे लगाए जा सकते हैं। अभी जो अमरुद के पौधे इन्होंने लगाए है। वह 13 मार्च 2019 को लगाए थे। छह महीने होने के बाद से ही फल आने लगे। बाग में गोबर की जैविक खाद और थोड़ी बहुत डीएपी डाली गई है। एक-एक डाल पर 8-10 के गुच्छों में फूल और फल लगते हैं। यह फूल जितने होंगे उतने ही फल लगेंगे। यह इसकी विशेषता है। इस पौधे की तकनीकी जानकारी देते हुए कहते हैं, "पौधों में तने की नहीं बल्कि ज्यादा शाखाओं की आवश्यकता होती है। इसका फायदा यह होता है कि पैदावार ज्यादा होती है। फलदार पौधे में जितनी शाखाएं होंगी उतने ज्यादा फल लगेंगे। इनका लक्ष्य है साल में 150 शाखाएं लाना और हर पौधों की ऊंचाई 6 फिट से ज्यादा नहीं लेकर जाना।"

अमरूद की उन्नत किस्में 


भारत में अमरूद की अनेक किस्में पाई जाती हैं। थोड़ी बहुत भिन्नता के साथ भारत में इसकी 80-90 किस्में उगाई जाती है। लेकिन व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो अमरूद की करीब 10 उन्नत किस्में ऐसी हैं, जिसे बड़े पैमाने पर उगाया जा रहा है
  • इलाहाबाद सफेदा अर्का मृदुला
  • L49
  • ताइवान पिंक

अमरूद की खेती के लिए जलवायु, भूमि और समय

अमरूद की खेती गर्म और शुष्क जलवायु में सफलता पूर्वक की जा सकती है, क्योंक ये गर्मी और पाला दोनों सहन कर सकता है। लेकिन अधिक वर्षा वाले इलाके में अमरूद की खेती करना सही नहीं होता है। अमरूद की खेती के लिये 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल माना जाता है|
वैसे तो अमरूद की खेती हर प्रकार के मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन इसकी अच्छी उपज के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती है।
अमरूद की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का महीना सबसे अच्छा होता है। जहां पर सिंचाई की वयवस्था हो वहां फरवरी मार्च में भी अमरूद के बीज आप लगा सकते हैं।

उपरोक्त गुणों से युक्त वृक्ष को चयनित करके उन पर किसी विशेष रंग की पट्टी बांधे और समय आने पर इन्ही पेड़ो की टहनियों का प्रयोग दाब कलम के लिए करें।
  • जमीन की जुताई

अमरूद की खेती के लिए सबसे पहले खेत की दो बार तिरछी जुताई करनी चाहिए और फिर इसे समतल करें। खेत को इस तरह तैयार करें कि उसमें पानी ना खड़ा रहे।
  • सिंचाई 

शरद ऋतु में पौधे के सिंचाई 15 दिन के अंतर पर तथा गर्मियों के मौसम में 7 दिन के अंतर पर करते रहना चाहिए। फल देने वाले पौधे से फल लेने के समय को ध्यान में रखकर सिंचाई करनी चाहिए। जैसे बरसात में फसल लेने के लिए गर्मी में सिंचाई की जाती है। जब कि सर्दी में अधिक फल लेने के लिए गर्मी में सिंचाई नहीं करनी चाहिए।
  • खाद एवं उर्वरक 

रोपाई के बाद भी समय- समय पर अमरूद के पौधे को खाद की जरूरत होती है, इसके लिए हर साल इसकी मात्रा अलग- अलग होती है।
पौधे की उम्रखाद की मात्रा
पहले सालगोबर की खाद 15 किलोग्राम, यूरिया 250 ग्राम, सुपर फास्फेट 375 ग्राम और पोटैशियम सल्फेट 500 ग्राम
दूसरे सालगोबर की खाद 30 किलोग्राम, यूरिया 500 ग्राम, सुपर फास्फेट 750 ग्राम व पोटैशियम सल्फेट 200 ग्राम
तीसरे सालगोबर की खाद 45 किलोग्राम, यूरिया 750 ग्राम, सुपर फास्फेट 1125 ग्राम व पोटैशियम सल्फेट 300 ग्राम
चौथे सालगोबर की खाद 60 किलोग्राम, यूरिया 1050 ग्राम, सुपर फास्फेट 1500 ग्राम व पोटैशियम सल्फेट 400 ग्राम
पांचवें सालगोबर की खाद 75 किलोग्राम, यूरिया 1300 ग्राम, सुपर फास्फेट 1875 ग्राम व पोटैशियम सल्फेट 500 ग्राम

  • कीट और रोग नियंत्रण

अमरूद में कीड़े का रोग बारिश के मौसम में अक्सर हो जाता है। ऐसे में कीटों के प्रकोप से बचने के लिए नीम की पत्तियों के उबले पानी का छिड़काव करना चाहिए।
वहीं अमरूद के प्रमुख रोग उकठा रोग, तना कैंसर आदि हैं। इसके निवारण के लिए रोगी पौधे को तुरंत निकाल कर नष्ट कर देना चाहिए और कटे भाग पर ग्रीस लगा कर बंद कर देना चाहिए।
  • पौधे की छटाई

पौधों की मजबूती और सही वृद्धि को बनाए रखने के लिए तने की हल्की छंटाई करनी जरूरी होती है। इसकी कटाई हमेशा नीचे से ऊपर की तरफ करनी चाहिए। इस तरह कटाई के बाद नईं टहनियां अकुंरन में मदद मिलती है।
  • फलों की तुड़ाई 

पौधा रोपन के 2-3 साल बाद अमरूद के फल लगने शुरू हो जाते हैं। फलों के पूरी तरह पकने के बाद इनकी तुड़ाई करनी चाहिए। पूरी तरह पकने के बाद फलों का रंग हरे से पीला होना शुरू हो जाता है। फलों की तुड़ाई सही समय पर कर लेनी चाहिए। फलों को ज्यादा पकने नहीं देना चाहिए।
  • मोटी कमाई का है सफल रास्ता एक वर्ष में कम से कम तीन बार फल लगते हैं। एक पौधा एक वर्ष में लगभग 30 किलो फल दे सकता है। जबकि एक बीघे में 500 तक पौधे लगाए जाते हैं। साल के डेढ़ सौ कुन्तल फल लग सकते हैं। हिसाब लगाया जाए तो 30 रुपए किलो से भी तो साल के 7 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई ही सकती है।

  • उत्पादन और कमाई

अमरूद की खेती कर 500 से 5000 पौधे प्रति हेक्टेयर पर 30 से 50 टन का उत्पादन किया जा सकता है। अमरूद की खेती से लाभ का अनुमान अमरूद के प्रकार पर निर्भर करता है, क्योंकि हर किस्म के अमरूद की कीमत मार्केट में अलग- अलग होती है। लेकिन ये तो तय है कि किसी भी अच्छे किस्म की अमरूद के फलों से साल में लाखों की कमाई कर सकते हैं।

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